Kṣānti–Tejas Viveka: Prahlāda’s Instruction to Bali
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क्रुद्ध: पापं नर: कुर्यात् क्रुद्धों हन्याद् गुरूनपि । क्रुद्ध: परुषया वाचा श्रेयसो5प्यवमन्यते,क्रोधी मनुष्य पाप कर सकता है, क्रोधके वशीभूत मानव गुरुजनोंकी भी हत्या कर सकता है और क्रोधमें भरा हुआ पुरुष अपनी कठोर वाणीद्वारा श्रेष्ठ मनुष्योंका भी अपमान कर देता है
人は怒りに駆られると罪を犯し、怒りのあまり師をさえ殺しうる。怒りに満ちた者は荒い言葉で、すぐれた人々すら侮辱する。
युधिछिर उवाच