रावण–मारीचसंवादः तथा मृगप्रलोभनपूर्वकं सीताहरणोपक्रमः
Rāvaṇa–Mārīca Dialogue and the Decoy-Deer Prelude to Sītā’s Abduction
असंतोष: परीतापो दृष्ट्वा दीप्ततरा: श्रिय: । यद् भवत्यवरे स्थाने स्थितानां तत् सुदुष्करम्,स्वर्गमें भी जो लोग नीचेके स्थानोंमें स्थित हैं, उन्हें अपनेसे ऊपरके लोकोंकी समुज्ज्वल श्रीसम्पत्ति देखकर जो असंतोष और संताप होता है, उसका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है
たとえ天界にあっても、下位の座にある者たちは、自分より上の世界のいよいよ輝かしい栄華と福徳を見て、不満と胸を灼く苦悩に襲われる。その不満と苦しみを言い尽くすことは、まことに至難である。
देवदूत उवाच