रावण–मारीचसंवादः तथा मृगप्रलोभनपूर्वकं सीताहरणोपक्रमः
Rāvaṇa–Mārīca Dialogue and the Decoy-Deer Prelude to Sītā’s Abduction
सोअत्र दोषो मम मतस्तस्यान्ते पतनं च यत् | सुखबव्याप्तमनस्कानां पतनं यच्च मुदूगल,मुद्गल! स्वर्गमें सबसे बड़ा दोष मुझे यह जान पड़ता है कि कर्मोंका भोग समाप्त होनेपर एक दिन वहाँसे पतन हो ही जाता है। जिनका मन सुखभोगमें लगा हुआ है, उनको सहसा पतन कितना दुःखदायी होता है
「ムドガラよ!我が見るところ、天界の最大の過失はこれである。すでになした業の果を享受し尽くせば、いつか必ずそこから堕ちる日が来る。快楽に心を浸しきった者にとって、その突然の墜落がいかに痛ましいことか!」
देवदूत उवाच