Duryodhana’s Śaraṇāgati and the Pāṇḍavas’ Resolve
Gandharva Encounter
ब्रह्मदत्तवर: स्कन्द त्वयायं महिषो हतः । देवास्तृणसमा यस्य बभूवुर्जयतां वर,“विजयी वीरोंमें श्रेष्ठ स्कन््द! इस महिषासुरको ब्रह्माजीने वरदान दिया था, जिसके कारण इसके सामने सब देवता तिनकोंके समान हो गये थे। आज तुमने इसे मार गिराया है। महाबाहो! यह देवताओंके लिये बड़ा भारी काँटा था, जिसे तुमने निकाल फेंका है। यही नहीं, आज रणभूमिमें इस महिषके समान पराक्रमी एक सौ देवद्रोही दानव और तुम्हारे हाथसे मारे गये हैं, जो पहले हमें बहुत कष्ट दे चुके हैं। तुम्हारे पार्षद भी सैकड़ों दानवोंको खा गये हैं
brahmadattavaraḥ skanda tvayāyaṁ mahiṣo hataḥ | devās tṛṇasamā yasya babhūvur jayatāṁ vara ||
マールカンデーヤは言った。「おおスカンダ、勝利者の中の最上よ。梵天ブラフマーより恩寵の賜物を受けたこの水牛の魔は、汝によって討たれた。彼の前では神々さえ草の葉のごとく取るに足らぬものとなっていた。だが今日、正しき勇武により世界を護り、天の秩序はふたたび立て直されたのだ。」
मार्कण्डेय उवाच