पञ्चवर्णोत्पत्तिः — The Origin of the Five-Colored Fiery Being and Ritual-Disruptor Lineages
तस्यैव सिज्चते मूलं गुणान् पश्यति तत्र वै । द्विजश्रेष्ठ! बुद्धिमान् पुरुष धर्मसे ही आनन्द मानता है, धर्मका ही आश्रय लेकर जीवन- निर्वाह करता है और धर्मसे ही उपलब्ध किये हुए धनसे धनका ही मूल सींचता है, अर्थात् धर्मका पालन करता है। वह धर्ममें ही गुण देखता है
まさにその根を自ら潤し、そこに徳を見いだす。おお、二度生まれのうち最勝の者よ。賢者はダルマによってこそ歓喜すると知り、ダルマを拠り所として生を営み、ダルマによって得た財をもって「財の根」を潤す――すなわちダルマを守り行ずる。彼はダルマの中にこそ諸徳を見るのである。
व्याध उवाच