Adhyāya 208: Aṅgirasī-kanyāḥ
Enumeration of Aṅgiras’ daughters and attribute-names
क्रमेण संचितो धर्मो बुद्धियोगमयो महान् | शिष्टाचारे भवेत् साधू राग: शूक्लेव वाससि,जैसे कोई भी रंग सफेद कपड़ेपर ही अच्छी तरह खिलता है, उसी प्रकार शिष्टाचारका पालन करनेवाले पुरुषमें ही क्रमशः संचित किया हुआ बुद्धियोगमय महान् धर्म भलीभाँति प्रकाशित होता है
いかなる色も白布の上でこそ最も鮮やかに映えるように、教養ある作法を守る人においてこそ、智慧のヨーガを本質とし、段階を追って積み重ねられた偉大なるダルマは、よく明らかに輝き出る。
व्याध उवाच