इन्द्रस्य पाण्डवैः समागमः
Indra’s Meeting with the Pāṇḍavas
युधिछिर उवाच साहसाद् यदि वा मोहाद् भीम पापमिदं कृतम् | नैतत् ते सदृशं वीर मुनेरिव मृषा वध:,युधिष्ठिर बोले--वीर भीमसेन! तुमने दुःसाहसवश अथवा मोहके कारण जो यह पापकर्म किया है, वह मुनिवृत्तिसे रहनेवाले तुम्हारे अनुरूप नहीं है। राक्षसोंका यह संहार व्यर्थ ही किया गया है
ユディシュティラは言った。「勇士ビー マセーナよ! この罪業は、無謀な勇み足ゆえか、あるいは迷妄ゆえか、おまえにはふさわしくない。戒を守る牟尼が、むだな殺生をしないのと同じだ。羅刹たちをこのように滅ぼしたのは、結局むなしいことだった。」
युधिछिर उवाच