Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
तस्माद् देशे च दुर्गे च शत्रुमित्रबलेषु च । नित्यं चारेण बोद्धव्यं स्थान वृद्धि: क्षयस्तथा,इसलिये राजाको उचित है कि वह देश और दुर्गमें अपने शत्रु और मित्रोंके सैनिकोंकी स्थिति, वृद्धि और क्षयका गुप्तचरोंद्वारा सदा पता लगाता रहे
ゆえに王は、国土と要塞の内情、また敵軍と味方軍の兵勢の所在と、その増勢・減勢とを、密偵によって常に探り知るべきである。
वैशम्पायन उवाच