Vaitaraṇī-tīrtha and the Devayāna Path
Kaliṅga Episode
अन्यथा हि कुरुश्रेष्ठ देवयोनिरपां पति: । कुशाग्रेणापि कौन्तेय न स्प्रष्टव्यो महोदधि:,कुरुश्रेष्ठ! जलका स्वामी समुद्र देवताओंका अधिष्ठान है। कुन्तीनन्दन! ऊपर बतायी हुई रीतिके सिवा दूसरे किसी प्रकारसे इस महासागरका कुशके अग्रभागद्वारा भी स्पर्श नहीं करना चाहिये
さもなくば、クル族の最勝者よ、水の主たる大海は神々の依処である。クンティーの子よ、上に説かれた作法によらぬかぎり、この大海にはクシャ草の先でさえ触れてはならぬ。
लोमश उवाच