Udyoga Parva Adhyāya 92: Kṛṣṇasya sabhāpraveśaḥ
Krishna’s Entry into the Royal Assembly
न चापि मम पर्याप्ता: सहिता: सर्वपार्थिवा: । क्रुद्धस्य प्रमुखे स्थातुं सिंहस्येवेतरे मृगा:,जैसे क्रोधमें भरे हुए सिंहके सामने दूसरे पशु नहीं ठहर सकते, उसी प्रकार यदि मैं कुपित हो जाऊँ तो ये समस्त राजालोग एक साथ मिलकर भी मेरा सामना करनेमें समर्थ न होंगे
たとえ諸王が皆そろって結束しようとも、我が怒りが燃え上がるとき、我の前に立って抗するには足りぬ。怒れる獅子の前に、ほかの獣が立ち得ぬがごとく。
(वैशग्पायन उवाच