Saṃjaya’s Warning to Dhṛtarāṣṭra: Accountability, Alliance-Shift, and the Pāṇḍava Strategic Edge
इदं तु नाभिजानामि तव धीरस्य नित्यश: । यत् पुत्रवशमागच्छेस्तत्त्वज्ञ: सव्यसाचिन:,परंतु सदासे बुद्धिमान् माने जानेवाले आपके सम्बन्धमें मैं यह नहीं समझ पाता हूँ कि आप स्व्यसाची अर्जुनके बल-पराक्रमको अच्छी तरह जानते हुए भी क्यों अपने पुत्रोंके अधीन हो रहे हैं?
「しかし私には、常に剛毅で賢明と見なされるあなたについて、理解できぬことがあります。両手を自在に操る者(サヴィヤサーチー)アルジュナの力と武勇をよく知りながら、なぜあなたは息子たちの意のままに従い、その支配下に身を置かれるのですか。」
संजय उवाच