Strī Parva, Adhyāya 2 — Vidura’s Consolation on Kāla, Karma, and the Limits of Lamentation (विदुरोपदेशः)
हतो5पि लभते स्वर्ग हत्वा च लभते यश: । उभयं नो बहुगुणं नास्ति निष्फलता रणे,युद्धमें जो मारा जाता है, वह स्वर्गलोक प्राप्त कर लेता है और जो शत्रुको मारता है, उसे यशकी प्राप्ति होती है। ये दोनों ही अवस्थाएँ हमलोगोंके लिये बहुत लाभदायक हैं। युद्धमें निष्फलता तो है ही नहीं
戦に斃れる者は天界を得、敵を討つ者は名誉を得る。いずれも我らにとって大いなる利であり、戦場に無益というものはない。
विदुर उवाच