Rājapurohita-lakṣaṇa and Purūravas–Vāyu Saṃvāda
Varṇa, Sovereignty, and Abhaya-dāna
यदि स्वर्ग परं स्थान स्वधर्म परिमार्गसि । यत् किज्चिज्जयसे भूमिं ब्राह्मणाय निवेदय,यदि तुम स्वधर्म-पालनके फलस्वरूप स्वर्गलोकमें उत्तम स्थानकी खोज कर रहे हो (चाहते हो) तो जितनी भूमिपर तुम विजय प्राप्त करो, वह सब शास्त्र और सदाचारसे सम्पन्न, धर्मज्ञ, तपस्वी तथा स्वधर्मसे संतुष्ट ब्राह्मणको पुरोहित बनाकर सौंप दो, जो कि धनोपार्जनमें आसक्त न हो
yadi svargaḥ paraṁ sthānaṁ svadharma-parimārgasi | yat kiñcij jayase bhūmiṁ brāhmaṇāya nivedaya ||
アイラは言った。「自らのダルマ(svadharma)を守る果として天界の最上の位を求めるのなら、汝が征服したいかなる土地も、バラモンに捧げよ。聖典と善き行いに立ち、ダルマを知り、苦行に励み、自らの務めに満ち足り、財の追求に執着しない者である。その者を祭司(プーローヒタ)に任じ、土地を託せ。」
ऐल उवाच