राजा-दैवतत्वम् — The King as a Stabilizing ‘Daivata’ (Divine Function) in Social Order
इन्द्रमेव प्रवृणुते यद्राजानमिति श्रुति: । यथैवेन्द्रस्तथा राजा सम्पूज्यो भूतिमिच्छता,श्रुति कहती है, 'प्रजा जो राजाका वरण करती है, वह मानो इन्द्रका ही वरण करती है,, अतः लोकका कल्याण चाहनेवाले पुरुषको इन्द्रके समान ही राजाका पूजन करना चाहिये
indram eva pravṛṇute yad rājānam iti śrutiḥ | yathaivendraḥ tathā rājā sampūjyo bhūtim icchatā ||
ビーシュマは言った。「聖なる伝承(シュルティ)はこう宣言する。『民が王を選ぶとき、それはすなわちインドラを選ぶことに等しい』と。ゆえに、世の安寧と繁栄を願う者は、インドラに捧げるのと同じ敬意をもって王を敬うべきである—正当な王権のうちに、秩序と公共の善を支える神意にかなった支柱を見るがよい。」
भीष्म उवाच