Saṃhāra-krama (The Sequence of Cosmic Dissolution) — Yājñavalkya’s Discourse
तुल्यं शौचं तपोयुक्तं दया भूतेषु चानघ । व्रतानां धारणं तुल्यं दर्शनं॑ न समं तयो:,बाहर-भीतरकी पवित्रता, तप, प्राणियोंपर दया और व्रतोंका पालन आदि नियम दोनों मतोंमें समान रूपसे स्वीकार किये गये हैं। केवल उनके दर्शनोंमें अर्थात् पद्धतियोंमें समानता नहीं है
外と内の清浄、苦行を伴う修習、あらゆる生きものへの慈悲――汚れなき者よ――そして誓戒(ヴラタ)の保持。これらの規範は二つの立場において等しく認められている。だが、そのダルシャナ、すなわち方法と哲学的立脚点は同一ではない。
भीष्म उवाच