अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
परश्रेदेनमतिवादबाणै- भुशं विध्येच्छम एवेह कार्य: । संरोष्यमाण: प्रतिहृष्यते यः स आदत्ते सुकृतं वै परस्य,दूसरा कोई भी यदि इस विद्वान् पुरुषको कटठु-वचनरूपी बाणोंसे बहुत अधिक चोट पहुँचाये तो भी उसे शान्त ही रहना चाहिये। जो दूसरोंके क्रोध करनेपर भी स्वयं बदलेमें प्रसन्न ही रहता है, वह उसके पुण्यको ग्रहण कर लेता है
paraśreḍenātivādabāṇaiḥ bhṛśaṃ vidhyeccham eveha kāryaḥ | saṃroṣyamāṇaḥ pratihṛṣyate yaḥ sa ādattē sukṛtaṃ vai parasya ||
ハンサは言った。「たとえ誰かが、粗暴で度を越した言葉という鋭い矢で、この賢者を幾度も射抜こうとも、ここではただ静けさと自制をもって行ずべきである。人が怒りに燃えても、こちらは朗らかに揺るがず応じる者は、まことに相手の功徳を自らのものとして受け取る。」
हंस उवाच