अध्याय २९४ — योगलक्षणम् तथा सांख्यपरिसंख्यानम्
Yoga Definition and Sāṃkhya Enumeration
तस्मादहं ब्रवीमि त्वां राजन् संचिन्त्य शास्त्रत: । संसिद्धाधिगमं कुर्यात् कर्म हिंसात्मकं त्यजेत्,अतः राजन! मैं शास्त्रके अनुसार खूब सोच-विचारकर कहता हूँ कि मनुष्यको उन्नत होनेका प्रयत्न तो करना चाहिये, किंतु हिंसात्मक कर्मका त्याग कर देना चाहिये
ゆえに王よ、わたしはシャーストラに照らして熟考したうえで告げる。人は成就した悟りを得ようと努めるべきだが、暴力を本質とする行いは捨てねばならぬ。
पराशर उवाच