Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
एतद् राज्ञो दिलीपस्य राजानो नानुचक्रिरे । यस्येभा हेमसंछन्ना: पथि मत्ता: सम शेरते,“राजा दिलीपके इस महान् कर्मका अनुसरण दूसरे राजा नहीं कर सके। उनके सुनहरे साज-बाज और सोनेके आभूषणोंसे सजे हुए मतवाले हाथी रास्तेपर सोये रहते थे। सत्यवादी शतधन्वा महामनस्वी राजा दिलीपका जिन लोगोंने दर्शन किया था, उन्होंने भी स्वर्गलोकको जीत लिया
etad rājño dilīpasya rājāno nānucakrire | yasyebhā hemasaṃchannāḥ pathi mattāḥ samaśerate ||
ヴァーユは言った。「他の王たちは、ディリーパ王のこの業をまねることができなかった。黄金の飾り具に覆われた王の象たちは、酔えるほどの威力のまま大路に横たわり、恐れず、また誰ひとりとしてそれに挑む者もなかった。」
वायुदेव उवाच