Parāśara’s Counsel on बुद्धि (Discernment), Karma-Consequences, and Avoidance of Pāpānubandha Actions
कुरुनन्दन! इन्द्रको खड़ा देखकर भी वृत्रासुरके मनमें न तो घबराहट हुई, न कोई भय हुआ और न इन्द्रके प्रति उसकी कोई युद्धविषयक चेष्टा ही हुई ।। ततः समभवद् युद्ध त्रैलोक्यस्य भयंकरम् । शक्रस्य च सुरेन््द्रस्य वृत्रस्य च महात्मन:,फिर तो देवराज इन्द्र और महामनस्वी वृत्रासुरमें भारी युद्ध छिड़ गया, जो तीनों लोकोंके मनमें भय उत्पन्न करनेवाला था
tataḥ samabhavad yuddhaṃ trailokyasya bhayaṅkaram | śakrasya ca surendrasya vṛtrasya ca mahātmanaḥ ||
クルの誉れよ! インドラが立つのを見ても、ヴリトラの心には狼狽も恐れもなく、憎しみに駆られた軽率な戦意も起こらなかった。だがそれでも、三界を震え上がらせる大戦が起こった――諸天の主シャクラと、高き魂をもつ阿修羅ヴリトラとのあいだに。
भीष्म उवाच