कालनियमः शोकशमनं च
Kāla as Regulator; Pacification of Grief
इदं तु शृणु मे पार्थ ब्रुवन: संयतेन्द्रिय: । धर्ममन्ये वृत्तमन्ये धनमीहन्ति चापरे,“कुन्तीनन्दन! मैं जो बात कह रहा हूँ, उसे अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियोंको संयममें रखकर सुनो! कुछ लोग धर्मकी, कोई सदाचारकी और दूसरे कितने ही मनुष्य धनकी प्राप्तिके लिये सचेष्ट रहते हैं
パールタよ、諸々の感官をよく制して、わたしの語ることを聞け。ある者はダルマを求め、ある者は正しい行いを求め、また多くの者は財を得るために努める。
वैशम्पायन उवाच