बक-गौतमाख्यानम् / The Baka–Gautama Account
On Gratitude and Friendship Ethics
रौद्रं रूपमथोत्क्षिप्प चक्रे रूपं शिवं शिव: । दानवोंका वध करके जगतमें धर्मकी प्रधानता स्थापित करनेके पश्चात् भगवान् रुद्रदेवने उस रौद्ररूपको त्याग दिया। फिर वे कल्याणकारी शिव अपने मड़लमय रूपसे सुशोभित होने लगे || ६३ ई ।।
そのときシヴァはラウドラの形相を掲げ、やがて吉祥なるシヴァの姿へと転じた。ダーナヴァを討って世にダルマの優位を打ち立てたのち、主ルドラはその猛々しい姿を捨て、福徳をもたらすシヴァは静謐で瑞祥の相において輝き始めた。
भीष्म उवाच