शल्यस्य सेनापत्याभ्युपगमः | Śalya’s Acceptance of Command
यत् किंचित् सुद्गदा वाच्यं तत् सर्व श्रावितों हाहम् । कृतं च भवता सर्व प्राणान् संत्यज्य युध्यता,“विप्रवर! एक हितैषी सुहृदको जो कुछ कहना चाहिये, वह सब आपने कह सुनाया। इतना ही नहीं, आपने प्राणोंका मोह छोड़कर युद्ध करते हुए मेरी भलाईके लिये सब कुछ किया है
「婆羅門の中の最勝者よ! 善意の友が言うべきことは、あなたがすべて私に聞かせてくださった。しかもそれだけではない。あなたは命への執着を捨て、戦場で戦い抜いて、私のためにあらゆることを成してくださったのだ。」
संजय उवाच