अध्याय १ — न्यग्रोधवनोपवेशनम् तथा द्रौणिनिश्चयः
Night at the Banyan and Drauṇi’s Resolve
ते मुहूर्त तु विश्रम्य लब्धतोयै्हयोत्तमै: । सूर्यास्तमनवेलायां समासेदुर्महद् वनम्,उस स्थानपर थोड़ी देरतक ठहरकर उन सब लोगोंने अपने उत्तम घोड़ोंको पानी पिलाया और सूर्यास्त होते-होते वे उस विशाल वनमें जा पहुँचे, जहाँ अनेक प्रकारके मृग और भाँति-भाँतिके पक्षी निवास करते थे, तरह-तरहके वृक्षों और लताओंने उस वनको व्याप्त कर रखा था और अनेक जातिके सर्प उसका सेवन करते थे
te muhūrtaṁ tu viśramya labdha-toyaiḥ hayottamaiḥ | sūryāstam-anavelāyāṁ samāsedur mahad vanam ||
サンジャヤは言った。「彼らはしばし休み、優れた馬に水を飲ませたのち、日没のころ大いなる森へと至りました。そこは多くの鹿や鳥が棲み、さまざまな樹木と蔓草が繁り、幾多の蛇が出入りする荒野でありました。」
संजय उवाच