बहुशोणितदिग्धाड़यो मुक्तकेशयो रजस्वला: । एवं कृतोदका भार्या: प्रवेक्ष्यन्ति गजाह्नयम्,“जिनके अन्यायसे आज मैं इस दशाको पहुँची हूँ, आजके चौदहवें वर्षमें उनकी स्त्रियाँ भी अपने पति, पुत्र और बन्धु-बान्धवोंके मारे जानेसे उनकी लाशोंके पास लोट-लोटकर रोयेंगी और अपने अंगोंमें रक्त तथा धूल लपेटे, बाल खोले हुए, अपने सगे-सम्बन्धियोंको तिलांजलि दे इसी प्रकार हस्तिनापुरमें प्रवेश करेंगी”
bahuśoṇitadigdhāḍyo muktakeśyo rajasvalāḥ | evaṃ kṛtodakā bhāryāḥ pravekṣyanti gajāhvayam ||
ヴィドゥラは陰惨な反転を予告する。第十四年、非義を働いた者たちの妻たちこそが、同じ有様でハスティナープラへ入城するであろう――討たれた夫・子・親族の屍の傍らに身を転がし、止むことなく泣き叫び、血と塵にまみれ、髪は乱れほどけ、みずからの縁者に最後の水供養(ティラーンジャリ)を捧げるのだ。これは、アダルマが自らに返る暴力であることを示す警めである。無辜への残酷は、やがて同じ苦しみとなって己が家に実る。
विदुर उवाच