कर्णवधार्थं धनञ्जयस्य प्रतिज्ञा — Arjuna’s resolve for Karṇa’s defeat
बभौ बल तद्विमुक्तं पादबन्धाद विशाम्पते । मेघवृन्दाद् यथा मुक्तो भास्करस्तापयन् प्रजा:,प्रजानाथ! जैसे सूर्यदेव मेघोंकी घटासे मुक्त होकर सारी प्रजाको ताप देते हुए प्रकाशित हो उठते हैं, उसी प्रकार पैरोंके बन्धनसे छुटकारा पाकर वह सारी सेना बड़ी शोभा पाने लगी
サンジャヤは言った。「民の主よ、足の縛めから解き放たれたその軍勢は、ひときわ輝きを帯びた――雲の群れを脱した太陽が、衆生を灼きつつ照り映えるように。」
संजय उवाच