दुःशासननिग्रहः—द्रोणधृष्टद्युम्नयुद्धप्रसङ्गः
Rebuke of Duḥśāsana; Context of the Droṇa–Dhṛṣṭadyumna Combat
तद् युद्धमभवद् घोरं शरशक्तिसमाकुलम् | भीरूणां त्रासजननं शूराणां हर्षवर्धनम्,उन दोनोंके उस युद्धने बड़ा भयंकर रूप धारण किया। उसमें बाणों और शक्तियोंका ही अधिक प्रहार हो रहा था। वह भीरु पुरुषोंके हृदयमें भय और शूरवीरोंके हृदयमें हर्षकी वृद्धि करनेवाला था
両者の戦いは矢とシャクティ槍が乱れ飛ぶ、いよいよ凄惨なものとなった。それは臆病者の胸に恐怖を生じさせ、勇士の心には歓喜を増し加えた。
संजय उवाच