द्रोण–सात्यकि-युद्धम्
Droṇa–Sātyaki Engagement
रथाश्वद्विपपत्त्योधा: सलिलौघा इवाद्धभुता: । युगान्तादित्यरश्म्याभै: पाण्डवास्त्रशरैर्हता:,प्रलयकालके सूर्यकी किरणोंके समान अर्जुनके तेजस्वी बाणोंद्वारा मारे गये रथ, घोड़े, हाथी और पैदलोंके समूह सूर्यकिरणोंद्वारा सोखे गये अद्भुत जलप्रवाहके समान जान पड़ते थे
サンジャヤは言った。戦車・馬・象・歩兵の群れは、劫末の太陽光のごとく輝くパーンダヴァの武器と矢に討たれて、まるで日光に吸い尽くされ乾ききった不思議な水の奔流のように見えた。
संजय उवाच