Droṇa-pātana-paripṛcchā (Inquiry into the Fall of Droṇa) | द्रोणपातनपरिपृच्छा
तस्य शोणितदिग्धाड्ा: शोणास्ते वातरंहस: । आजानेया हया राजन्नविश्रान्ता ध्रुवं ययु:,उनके घोड़े स्वभावत: लाल रंगके थे। उसपर भी उनके सारे अंग खूनसे लथपथ होनेके कारण वे और भी लाल दिखायी देते थे। उनका वेग वायुके समान तीव्र था। राजन्! उन घोड़ोंकी नस्ल अच्छी थी और वे बिना विश्राम किये निरन्तर दौड़ लगाते रहते थे
sañjaya uvāca | tasya śoṇitadigdhāḥ śoṇāste vātaraṁhasaḥ | ājāneyā hayā rājann aviśrāntā dhruvaṁ yayuḥ ||
サञ्जयは言った。「彼の馬はもとより栗毛であったが、いまや血にまみれて、いっそう赤く見えた。風のごとく疾く、王よ、良き血統のその駿馬たちは疲れを知らず、戦の凄烈のただ中で休みなく前へ前へと駆け続けた。」
संजय उवाच