Adhyāya 57 — Arjuna’s Vow-Anxiety, Kṛṣṇa’s Counsel, and the Pāśupata Authorization
नटनर्तकगन्धर्व: पूर्णकैर्वर्धमानकै: । नित्योद्योगैश्ष क्रीडद्धिस्तत्र सम परिहर्षिता:,नित्य उद्योगशील एवं खेल-कूद करनेवाले नट, नर्तक और गन्धर्वगण कुक्कुटकी-सी आकृतिवाले आरतीके प्यालोंसे अपनी कला दिखाकर उक्त दिद्वानोंका मनोरंजन एवं हर्षवर्द्धन करते रहते थे
そこでは、常に励み、常に戯れを好む役者・舞人・ガンダルヴァ(Gandharva)たちが、鶏の姿に作られたアーラティ(ārati)の杯を用いて芸を披露し、かの賢者たちを楽しませ、その歓喜をいよいよ増し加えた。
नारद उवाच