Adhyāya 40 (Book 7, Droṇa-parva): Abhimanyu’s Rapid Advance and Battlefield Disruption
तत् त्वयेदमनुप्राप्तं प्रकोपाद् वै महात्मनाम् । “दूसरोंके धनका अपहरण, क्रोध, अशान्ति, लोभ, ज्ञानलोप, द्रोह, दुःसाहसपूर्ण बर्ताव तथा मेरे उग्र धनुर्धर पितरोंके राज्यका अपहरण--इन सभी बुराइयोंके फलस्वरूप उन महात्मा पाण्डवोंके क्रोधसे तुझे आज यह बुरा दिन प्राप्त हुआ है
これはまさしく大いなる者たちの憤りによって、汝に及んだのだ。「他人の財を奪うこと、怒り、心の不安、貪欲、智慧の失墜、背信、無謀な振る舞い、そして我が祖先—猛き弓取り—の国を奪ったこと。これら諸々の悪の報いとして、偉大なるパーンダヴァたちの憤怒が、今日、汝にこの凶日をもたらしたのだ。」
संजय उवाच