अध्याय ४ — भीष्मेन कर्णोत्साहनम्
Bhīṣma’s Encouragement of Karṇa
सो5भिवीक्ष्य नरौघाणां स्थानमप्रतिमं महत् । व्यूढप्रहरणोरस्कं॑ सैन्यं तत् समबृंहयत्,वहाँ कर्णने कौरव सैनिकोंका वह अनुपम एवं विशाल स्थान देखा। समस्त सैनिक व्यूहाकारमें खड़े थे और अपने वक्ष:स्थलके समीप अनेक प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंको बाँधे हुए थे। कर्णने उस समय सारी कौरव-सेनाको उत्साहित किया
so ’bhivīkṣya naraughāṇāṁ sthānam apratimaṁ mahat | vyūḍha-praharaṇoraskaṁ sainyaṁ tat samabṛṁhayat ||
サンジャヤは言った。「群がる戦士たちの、広大にして比類なき布陣——整然と陣形を組み、胸に鎧と諸々の武器を帯びた軍勢——それを見たカルナは、クル族(カウラヴァ)の軍の気勢をいよいよ奮い立たせ、来たる激突へと鼓舞した。」
संजय उवाच