अध्याय ४ — भीष्मेन कर्णोत्साहनम्
Bhīṣma’s Encouragement of Karṇa
शिवेनाभिवदामि त्वां गच्छ युध्यस्व शत्रुभि: | अनुशाधि कुरून् संख्ये धत्स्व दुर्योधने जयम्,“मैं तुम्हारा कल्याणचिन्तन करते हुए तुम्हें आशीर्वाद देता हूँ, जाओ, शत्रुओंके साथ युद्ध करो। रणक्षेत्रमें कौरव सैनिकोंको कर्तव्यका आदेश दो और दुर्योधनको विजय प्राप्त कराओ
「吉祥をもって汝に礼を述べ、祝福する。行け、敵と戦え。戦場においてクル族の兵を義務(ダルマ)に従って統率し、ドゥルヨーダナに勝利を得させよ。」
संजय उवाच