अभिमन्युना दुःशासनस्य ताडनम्
Abhimanyu’s Rebuke and Wounding of Duḥśāsana; Karṇa’s Counter-volley
अपना बा | अफड-#-कात जा एकोनचत्वारिशोड ध्याय: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दुःशासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना धृतराष्ट उवाच द्वैधीभवति मे चित्तं द्विया तुष्ट्या च संजय । मम पुत्रस्य यत् सैन्यं सौभद्र: समवारयत्,धृतराष्ट्र बोले--संजय! सुभद्राकुमारने मेरे पुत्रकी सेनाको जो आगे बढ़नेसे रोक दिया, इसे सुनकर लज्जा और प्रसन्नतासे मेरे चित्तकी दो अवस्थाएँ हो रही हैं
dhṛtarāṣṭra uvāca | dvaidhībhavati me cittaṃ vrīḍayā tuṣṭyā ca sañjaya | mama putrasya yat sainyaṃ saubhadraḥ samavārayat ||
ドリタラーシュトラは言った。「サञ्जयよ、スバドラの子がわが子らの軍勢の進撃を食い止め、押しとどめたと聞いて、我が心は恥と満足とのあいだで二つに裂けている。」
धृतराष्ट उवाच