उत्पपातान्तरिक्षं च जहास च सुविस्तरम् | कर्णमभ्यहनच्चैव गजेन्द्रमिव केसरी,क्रोधसे लाल आँखें किये वह क्रूर पराक्रमी राक्षस उपर्युक्त बात कहकर आकाशमें उछला और बड़े जोरसे अट्टहास करने लगा। फिर जैसे सिंह गजराजपर चोट करता है, उसी प्रकार वह कर्णपर आघात करने लगा
怒りに燃えて眼を赤くしたその残忍にして勇猛なる羅刹は、かの言葉を告げるや天へと跳び上がり、轟くばかりに高らかに哄笑した。ついで獅子が象王を打つがごとく、カルナへと猛然と打ちかかった。
संजय उवाच