Droṇa’s Withdrawal, Death, and the Kaurava Rout (द्रोणनिधन-प्रसङ्गः)
सब लोगोंने देखा कि मशाल और तेल हाथमें लिये पैदल सैनिकोंद्वारा सेवित सारी सेनाएँ रात्रिके समय उसी प्रकार प्रकाशित हो उठी हैं, जैसे आकाशमें बादल बिजलियोंके प्रकाशसे प्रकाशित हो उठते हैं ।। प्रकाशितायां तु ततो ध्वजिन्यां द्रोणो&ग्निकल्प: प्रतपन् समन्तात् । रराज राजेन्द्र सुवर्णवर्मा मध्यं गत: सूर्य इवांशुमाली
prakāśitāyāṃ tu tato dhvajinyāṃ droṇo 'gnikalpaḥ pratapan samantāt | rarāja rājendra suvarṇavarmā madhyaṃ gataḥ sūrya ivāṃśumālī ||
サンジャヤは言った。「軍がこのように照らし出され――松明と油を携えた歩兵が近くで奉仕する中――火のごとく燃え立ち、四方を灼くドローナは、王の中の最上よ、ひときわ輝きを放った。黄金の鎧をまとい、彼は中央に立って、光芒を放つ太陽のようであった。」
संजय उवाच