Droṇa-parva Adhyāya 155 — Ghaṭotkaca-nidhana-śoka and Karṇa-śakti-vyaya
Kṛṣṇa’s strategic reassurance
हतो राजेति राजेन्द्र मुदितानां समन््ततः । बाणशब्दरवश्षोग्र: शुश्रुवे तत्र मारिष,आदरणीय राजेन्द्र! उस समय प्रसन्न हुए पांचाल सैनिकोंने “राजा दुर्योधन मारा गया' ऐसा कहकर चारों ओर अत्यन्त महान् कोलाहल मचाया। वहाँ बाणोंका भयंकर शब्द भी सुनायी दे रहा था
サञ्जयは言った。「『王は討たれた!』――王よ――喜ぶ者たちの声が四方に満ちた。そこではまた、尊き御方よ、矢の響きと荒々しい轟きが激しく聞こえていた。」
संजय उवाच