दुर्योधनस्य कर्णप्रार्थना — कृपकर्णसंवादः
Duryodhana’s Appeal to Karna — The Kripa–Karna Dialogue
कर्ण उवाच भीमाहितैस्तव रणे स्वप्रेडपि न विभावितम् । तद् दर्शयसि कस्मान्मे पृष्ठं पार्थदिदृक्षया,कर्णने कहा--भीमसेन! तुम्हारे शत्रुओंने स्वप्नमें भी यह नहीं सोचा था कि तुम युद्धमें पीठ दिखाओगे; परंतु इस समय अर्जुनसे मिलनेके लिये तुम मुझे पीठ क्यों दिखा रहे हो?
カルナは言った。「ビーマセーナよ。汝の敵は、夢にさえ汝が戦で背を見せるとは思わなかった。しかるに今、アルジュナに会わんとして、なぜ我に背を向けるのだ。」
कर्ण उवाच