दुर्योधन-कर्ण-संवादः
Duryodhana–Karna Dialogue on Vyūha-bheda and Daiva
तांस्तु द्रोणविनिर्मुक्तान् क्रुद्धाशीविषसंनिभान् | एकैकं पज्चभिर्बाणैर्युधि चिच्छेद हृष्टवत्,द्रोणाचार्यके छोड़े हुए रोषभरे विषधर सर्पोंके समान उन भयंकर बाणोंमेंसे प्रत्येकको बृहत्क्षत्रने युद्धमें पाँच-पाँच बाण मारकर प्रसन्नतापूर्वक काट डाला
ドローナ師の放った、怒れる毒蛇にも似た恐るべき矢を見て、ヴリハトクシャトラは戦場において一本一本に五本ずつの矢を放ち、喜びを帯びてそれらを断ち切った。
संजय उवाच