Droṇa–Arjuna Yuddha; Trigarta-Āvaraṇa; Bhīmasena Gajānīka-bheda
Droṇa and Arjuna Engage; Trigarta Containment; Bhīma Breaks the Elephant Corps
प्रयुक्ता रथिभिर्बाणा भीमवेगा: सुतेजना: । ते निपेतुर्महाराज नागेषु च रथेषु च,कथयामास दुर्धर्षो विनि:श्वस्य पुनः पुनः । संजय कहते हैं--महाराज! शत्रुओंको संताप देनेवाला राजा दुर्योधन उस महान् युद्धमें एक राक्षसके द्वारा प्राप्त हुई अपनी पराजयको नहीं सह सका। उसने गंगानन्दन भीष्मजीके पास जाकर उन्हें विनीतभावसे प्रणाम करनेके पश्चात् सारा वृत्तान्त यथावत् रूपसे कह सुनाया। उस दुर्धर्ष वीरने बारंबार लम्बी साँस खींचकर घटोत्कचकी विजय और अपनी पराजयकी कथा कही महाराज! रथियोंद्वारा प्रयुक्त हुए भयंकर वेगशाली तेज बाण हाथियों और रथोंपर गिरने लगे
sañjaya uvāca | prayuktā rathibhir bāṇā bhīmavegāḥ sutejanāḥ | te nipetur mahārāja nāgeṣu ca ratheṣu ca |
サञ्जयは語った。「大王よ。車戦士たちの放った矢は、恐るべき速さで、力の光を帯び、雨のごとく戦象と戦車の上に降り注いだ。この光景は、戦の狂乱の中で、武の技と憤怒が分別なき破壊へと変じ、人も戦獣も等しく損なわれ、争いの道義的重みがいよいよ増すことを示している。」
संजय उवाच