Vāsudeva-Māhātmya: Duryodhana’s Inquiry and Bhīṣma’s Theological Account of Keśava
लोगोंको ऐसा मालूम हो रहा था कि रफणक्षेत्रमें भीष्मजीने मायासे अपनेको अनेक रूपोंमें प्रकट कर लिया है। जिन लोगोंने उन्हें पूर्वदिशामें देखा था, उन्हीं लोगोंको अखि फिरते ही वे पश्चिममें दिखायी दिये ।। उदीच्यां चैवमालोक्य दक्षिणस्यां पुनः प्रभो । एवं स समरे शूरो गाड़्जेय: प्रत्यदृश्यत,प्रभो! बहुतोंने उन्हें उत्तर दिशामें देखकर तत्काल ही दक्षिण दिशामें भी देखा। इस प्रकार समरभूमिमें वे शूरवीर गंगानन्दन भीष्म सब ओर दिखायी दे रहे थे
sañjaya uvāca | uदीcyāṃ caivam ālokya dakṣiṇasyāṃ punaḥ prabho | evaṃ sa samare śūro gāṅgeyaḥ pratyadṛśyata ||
サンジャヤは言った。「主君よ、北方に見えたかと思えば、たちまち南方にも見えた。かくして戦のただ中で、ガンガーの子たる勇将ビ―シュマは、あらゆる方角に姿を現しているかのようであった。」
संजय उवाच