भीष्मस्य धनुषश्छेदं नामृष्यन्त महारथा:,अताडयन् रणे भीष्मं सहिता: सर्वसृञज्जया: । समस्त सूंजय वीर एक साथ संगठित हो भयंकर शतघ्नी, परिघ, फरसे, मुद्गर, मुसल, प्रास, गोफन, स्वर्णमय पंखवाले बाण, शक्ति, तोमर, कम्पन, नाराच, वत्सदन््त और भुशुण्डी आदि अस्त्र-शस्त्रोंद्वारा रणभूमिमें भीष्मको सब ओरसे पीड़ा देने लगे अभिपेतुर्भुशं क्रुद्धाश्छादयन्तश्न॒ पाण्डवम् | भीष्मके धनुषका काटा जाना कौरव महारथियोंको सहन नहीं हुआ। द्रोण, कृतवर्मा, सिन्धुराज जयद्रथ, भूरिश्रवा, शल, शल्य और भगदत्त--ये सात महारथी अत्यन्त क़ुद्ध हो किरीटधारी अर्जुनकी ओर दौड़े तथा अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रोंका प्रदर्शन करते हुए पाण्डुनन्दन अर्जुनको अत्यन्त क्रोधपूर्वक बाणोंसे आच्छादित करने लगे
sañjaya uvāca | bhīṣmasya dhanuṣaś chedaṃ nāmṛṣyanta mahārathāḥ, atāḍayan raṇe bhīṣmaṃ sahitāḥ sarvasṛñjayāḥ | abhipetur bhuśaṃ kruddhāś chādayantaś ca pāṇḍavam ||
サンジャヤは言った。「ビ―シュマの弓が断ち切られたことに耐えられず、偉大なる戦車武者たちは、スリンジャヤの勇士たちと相集い、戦場でビ―シュマに襲いかかった。ついで激怒のまま前へ躍り出て、武威を誇示しつつ、パーンダヴァ(アルジュナ)に矢の雨を浴びせ、四方から呑み込まんとした。」
संजय उवाच