कि ते विवक्षया वीर जहि भीष्मं महारथम् । न हान्यमनुपश्यामि कज्चिद् यौधिष्ठिरे बले,“वीर! इस विषयमें बार-बार विचारने या संदेह निवारणके लिये कुछ कहनेकी आवश्यकता नहीं है। तुम महारथी भीष्मको शीघ्र मार डालो। युधिष्ठिरकी सेनामें तुम्हारे सिवा दूसरे किसीको ऐसा नहीं देखता, जो समरभूमिमें भीष्मका सामना कर सके। पुरुषसिंह! मैं तुमसे यह सच्ची बात कह रहा हूँ
sañjaya uvāca |
kiṁ te vivakṣayā vīra jahi bhīṣmaṁ mahāratham |
na hi anyam anupaśyāmi kaścid yudhiṣṭhire bale ||
サンジャヤは言った。「勇士よ、これ以上何を語り、何を思案するというのか。大車戦士ビーマを討て。ユディシュティラの軍の中で、戦場においてビーマに真に対抗できる者は、そなた以外に見当たらぬのだ。」
संजय उवाच