शकुनेः पुत्रेण सह आश्वमेधाश्वविषयः संघर्षः — Arjuna’s restrained engagement with Śakuni’s son during the horse-escort
तेषां निविशतां तेषु शिविरेषु महात्मनाम् । नर्दत: सागरस्येव दिवस्पृणभवत् स्वनः,वहाँ बने हुए विभिन्न शिविरोंमें प्रवेश करनेवाले महामनस्वी नरेशोंका जो कोलाहल सुनायी पड़ता था, वह समुद्र की गम्भीर गर्जनाके समान सम्पूर्ण आकाशमें व्याप्त हो रहा था
その大いなる心をもつ王たちが諸々の陣営へと入ってゆくとき、立ちのぼる喧噪は、深海の海が轟くがごとく天を満たした。
वैशम्पायन उवाच