दानफलप्रकरणम् — उपानहदानं, तिलदानं, भूमिदानं, गोदानं, अन्नदानं च
Gifts and Their Stated Results: Footwear, Sesame, Land, Cows, and Food
मनुष्य इहलोक और परलोकमें अपने कर्मके अनुसार ही जीवन-निर्वाह करते हैं। भूमि ऐश्वर्यस्वरूपा महादेवी है। वह दाताको अपना प्रिय बना लेती है ।। य एतां दक्षिणां दद्यादक्षयां राजसत्तम । पुनर्नरित्वं सम्प्राप्य भवेत् स पृथिवीपति:,नृपश्रेष्ठी जो इस अक्षय भूमिका दान करता है वह दूसरे जन्ममें मनुष्य होकर पृथ्वीका स्वामी होता है
yā etāṁ dakṣiṇāṁ dadyād akṣayāṁ rājasattama | punar naritvaṁ samprāpya bhavet sa pṛthivīpatiḥ ||
ビーシュマは言った。「王の中の最勝者よ、この尽きることなき施し――繁栄を体現する大女神たる土地――を授ける者は、彼女の恩寵を得る。さらに再び人として生を受ければ、その施主は大地の主となる。」
भीष्म उवाच