अध्याय ५६ — च्यवन–कुशिकसंवादः
Cyavana–Kuśika Dialogue on Lineage, Conflict, and Transmission
वे फिर यथास्थान खड़े होकर मुनिके पैर दबाने लगे। अबकी बार वे महामुनि दूसरी करवटसे सोये थे ।। तेनैव च स कालेन प्रत्यबुद्धयत वीर्यवान् | न च तौ चक्रतु: किंचिद् विकारं भयशड्कितौ,शक्तिशाली च्यवन मुनि फिर उतने ही समयमें सोकर उठे। राजा और रानी उनके भयसे शंकित थे, अतः उन्होंने अपने मनमें तनिक भी विकार नहीं आने दिया
tenaiva ca sa kālena pratyabuddhyata vīryavān | na ca tau cakratuḥ kiñcid vikāraṃ bhayaśaṅkitau ||
ビーシュマは言った。「彼らは再び所定の位置に立ち、牟尼の足を揉み続けた。今度は大牟尼は反対側を下にして眠っていた。やがて同じほどの時が過ぎると、剛力のチャヴァナはまた目を覚ました。王と王妃は彼を恐れて胸騒ぎし、顔色にも振る舞いにもわずかな乱れすら生じさせず、以前と同じく奉仕を続けた。」
भीष्म उवाच