कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
सम्मान्यांश्षावमन्यन्ते वृद्धान् परिभवन्ति च । एवंविधा नरा देवि सर्वे निरयगामिन:,गुरुके आनेपर प्रेमपूर्वक उनकी पूजा नहीं करते--उन्हें गुरुवत् सम्मान नहीं देना चाहते, अभिमान और लोभके वशीभूत होकर वे सम्माननीय मनुष्योंका अपमान और बड़े- बूढ़ोंका तिरस्कार करते हैं। देवि! ऐसा करनेवाले सभी मनुष्य नरकगामी होते हैं
sammānyān avamanyante vṛddhān paribhavanti ca | evaṃvidhā narā devi sarve nirayagāminaḥ ||
彼らは敬うべき者を侮り、また老いた人々をも辱める。おお女神よ、このような人間は—ことごとく—地獄へと定められる。驕りと貪欲に駆られ、年長者や尊ぶべき人を師として礼敬することを拒み、かえって蔑みをもって接するからである。
श्रीमहेश्वर उवाच