कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
गुरु चाभिगतं प्रेम्णा गुरुवन्न बुभूषते । अभिमानप्रवृत्तेन लोभेन समवस्थिता:,गुरुके आनेपर प्रेमपूर्वक उनकी पूजा नहीं करते--उन्हें गुरुवत् सम्मान नहीं देना चाहते, अभिमान और लोभके वशीभूत होकर वे सम्माननीय मनुष्योंका अपमान और बड़े- बूढ़ोंका तिरस्कार करते हैं। देवि! ऐसा करनेवाले सभी मनुष्य नरकगामी होते हैं
guruṁ cābhigataṁ premṇā guruvan na bubhūṣate | abhimāna-pravṛttena lobhena samavasthitāḥ |
師が訪れても、彼らは愛敬をもって供養せず――師を師として敬おうとしない。驕りと貪りに支配され、敬うべき人を侮り、年長者を蔑む。おおデーヴィーよ、そのように振る舞う者は皆、地獄へと定められる。
श्रीमहेश्वर उवाच