Dhaumya’s Enumeration of Eastern Tīrthas
Prācī-diś Tīrtha-kathana
तत्र मासं वसेद् धीरो नियतो नियताशन: । ब्रहद्मलोकं व्रजेद् राजन् कुलं चैव समुद्धरेत्,धीर पुरुषको चाहिये कि वह नियमपालनपूर्वक नियमित भोजन करते हुए एक मासतक वहाँ रहे। राजन् ऐसा करनेवाला तीर्थयात्री ब्रह्मलोकमें जाता और अपने कुलका उद्धार कर देता है
पुलस्त्य उवाच