Pulastya’s Tīrtha Enumeration: Sarasvatī, Naimiṣa, Gayā, and Associated Phalaśruti
Chapter 82
समृद्धमसपत्नं च श्रिया युक्त नरोत्तम: । वहाँ भगवान् शिवका निकटसे दर्शन करके नरश्रेष्ठ यात्री एक हजार गोदानका फल पाता है और महादेवजीके प्रसादसे वह गणोंका आधिपत्य प्राप्त कर लेता है, जो आधिपत्य भारी समृद्धि और लक्ष्मीसे सम्पन्न तथा शत्रुजनित बाधासे रहित होता है
घुलस्त्य उवाच