वैशम्पायन उवाच ततः शक्ति प्रज्वलितां प्रतिगृह्म विशाम्पते । शस्त्र गृहीत्वा निशितं सर्वगात्राण्यकृन्तत,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! तदनन्तर इन्द्रकी प्रजवलित शक्ति लेकर कर्णने तीखी तलवार उठायी और कवच उधेड़नेके लिये अपने सब अंगोंको काटना आरम्भ किया
वैशम्पायन उवाच